उत्तराखंड में कोरोना के बढ़ते केसों के बीच लोगों की मुश्किलें बढ़ने के साथ ही शादी करवाने वाले बैंड बाजा की रौनक भी फीकी होती जा रही है। शादी और बैंड बाजा की रौनक पर कोरोना संक्रमण का एक बार फिर से ग्रहण लग गया है।इससे जुड़े कई कर्मचारियों ने काम छोड़कर अब अन्य कामों की राह पकड़ ली है। उनका कहना है कि इस कारोबार से जुड़े लोगों को लोन मिलना भी बेहद मुश्किल है। करीब 30 फीसदी ही काम है। शादी समारोह के लिए खुशियों को बांटने के लिए सर्दी के मौसम को काफी मुफीद माना जाता है।
हर कोई यही चाहता है कि सर्दी के मौसम में शादी और अन्य समारोह करें। लेकिन इस मौसम में भी लोग खुलकर अपनी खुशियां नहीं मना पा रहे हैं। पिछले दो साल में हर काम और कारोबारी विभिन्न तरह की परेशानी से लड़ता आ रहा है। अब संक्रमण के नए स्वरूप ने भी हर प्रकार के कारोबार और उनसे जुड़े लोगों को हाशिए पर लाकर खड़ा कर दिया है। बैंड बाजा और शादी समारोह से जुड़े कर्मचारी और कारीगरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई लोगों ने तो इस पेश को छोड़कर दूसरे कामों को अपना लिया है।
कारीगरों ने थामा दूसरे कामों का हाथ
रामदयाल ने बताया कि वह हलवाई का काम करते हैं। उनके साथ करीब दस और अन्य साथी हैं। जो शादी व अन्य समारोह में खाना बनाते हैं। तीन साल में उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है। सीमित संख्या से खाना भी लिमिटेड कर दिया गया है। जब काम ही नहीं मिलेगा तो परेशानियां बढ़ना लाजमी है। कई कारीगर काम छोड़ कर जा चुके हैं और मजबूरन सब्जी बेचना, ई-रिक्शा चलाना और मेहनत मजदूरी करने को मजबूर हैं।
जमा पूंजी से दिया जा रहा वेतन
अफजाल ने बताया कि वह खुद का बैंड बाजे का कारोबार करते हैं। उनके यहां15 कर्मचारी काम करते हैं। सर्दियों में शादी का सीजन है। कोरोना ने कारोबार बंदी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। लोगों को डर है कि कहीं दोबारा से लॉकडाउन न लग जाए। जिस वजह से शादी समारोह के काम बहुत कम हो गए हैं। गाइडलाइन का पालन करने के लिए लोगों ने अब बारात को बंद कर दिया है। जिस वजह से हालात और बिगड़ गए हैं। जमा पूंजी से ही कर्मचारियों को वेतन देना पड़ रहा है।
लोगों की खुशियों को खा गया कोरोना
मुकेश उर्फ बब्लू का कहना है कि वह ढोल बजाने का काम करते हैं। तीन साल से उनका यह काम लगभग 30 परसेंट पर आ चुका है। हालांकि कुछ छोटे-मोटे कार्यक्रम मिलते रहते हैं लेकिन उनसे भरपाई नहीं होती। सरकार की ओर से बड़े कारोबार को तो काफी सहूलियत दी जाती है, लेकिन छोटे कारोबार और लोगों को सरकार की ओर से कोई लाभ न मिलना चिंता का विषय है। संक्रमण ने लोगों की खुशियों पर ग्रहण लगा दिया है। जिस वजह से अब उनका कारोबार भी खत्म होने की कगार पर पहुंच चुका है।
