विश्व प्रसिद्ध कार्बेट नेशनल पार्क में बिना मंजूरी के बाघ और हाथी रेस्क्यू सेंटर का निर्माण करा दिया गया है। यही नहीं इस पर बिना वित्तीय स्वीकृति के ही करीब दस करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। इसकी जानकारी मिलने से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। इसकी जांच की तैयारी की जा रही है।
कार्बेट की ढेला रेंज में पार्क प्रशासन की ओर 2019 में करीब 20 करोड़ रुपये से एक बाघ रेस्क्यू सेंटर का प्रस्ताव शासन को मंजूरी के लिए भेजा गया था। इसके लिए केंद्र और सेंट्रल जू अथॉरिटी से भी एनओसी ली जानी थी। लेकिन एस्टीमेट, डीपीआर और अन्य औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण सितंबर 2020 में तत्कालीन प्रमुख सचिव वन आनंद वर्द्धन की ओर से वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति देने से इनकार कर दिया था।
साथ ही तत्कालीन पीसीसीएफ और चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन को पत्र भेजकर दोबारा प्रस्ताव भेजने को कहा गया था। लेकिन दोबारा प्रस्ताव भेजने के बजाए वहां बिना मंजूरी के ही रेस्क्यू सेंटर का निर्माण शुरू कर दिया। जो कि अब तक करीब 80 फीसदी तक हो चुका है।
जिस पर अब तक करीब दस करोड़ रुपये भी खर्च कर दिए गए हैं जो कि फायर के बजट से खर्च किए गए। हैरानी की बात है कि इसके लिए ना तो सेंट्रल जू अथॉरिटी से और ना ही एनटीसीए से कोई मंजूरी ली गई। इसके बाद भी चार बाघ और हाथी केयर यूनिट सहित कई निर्माण करवा दिए। इसकी जानकारी मिलने के बाद वित्त एवं नियोजन ने पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ से इसके बजट और मंजूरियों पर सूचना और स्पष्टीकरण मांगा है। इससे विभाग में हड़कंप है।
