रुद्रप्रयाग: केदारनाथ यात्रा के अहम पड़ाव सोनप्रयाग में बारिश ने बहुमंजिला पार्किंग की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी. लगातार बारिश के बाद पार्किंग परिसर में जगह-जगह जलभराव हो गया. जिससे पार्किंग स्थल तालाब में तब्दील नजर आया. पानी निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से चालकों को अपने वाहनों को पार्क करने और निकालने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा. वहीं, केदारनाथ धाम की यात्रा पर पहुंचे तीर्थयात्रियों को भी पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ा.
जलभराव से यात्री परेशान: बता दें कि सोनप्रयाग में केदारनाथ यात्रा के दौरान काफी संख्या में यात्री और वाहन पहुंचते हैं. ऐसे में बहुमंजिला पार्किंग यात्रा प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन बारिश के दौरान यहां जलभराव की स्थिति ने पार्किंग की उपयोगिता और व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पार्किंग परिसर के कई हिस्सों में पानी जमा होने से यात्रियों और वाहन चालकों की आवाजाही प्रभावित रही.
पानी निकासी की व्यवस्था पर उठे सवाल: बारिश का पानी पार्किंग परिसर में जमा होने के पीछे पर्याप्त जल निकासी व्यवस्था का अभाव प्रमुख समस्या के रूप में सामने आया है. जलभराव के कारण पार्किंग स्थल पर वाहन खड़े करने और निकालने में चालकों को परेशानी हुई. वहीं, यात्रियों को भी सामान लेकर पानी और कीचड़ के बीच आवाजाही करनी पड़ी.
यात्रियों का कहना है कि यात्रा सीजन में सोनप्रयाग जैसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर पार्किंग के साथ-साथ पैदल आवाजाही वाले हिस्सों में भी बेहतर जल निकासी और साफ-सफाई की व्यवस्था होनी चाहिए. बारिश के दौरान जलभराव की समस्या लगातार सामने आती है, तो इसका स्थायी समाधान किया जाना जरूरी है.
“सोनप्रयाग केदारनाथ यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है और यहां देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं. पार्किंग परिसर में बारिश के दौरान पानी भरना गंभीर समस्या है. जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से वाहन चालकों और तीर्थयात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है. संबंधित विभाग को समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए. ताकि, यात्रियों को किसी तरह की दिक्कत न हो.“- अंकित गैरोला, अध्यक्ष, व्यापार संघ सोनप्रयाग
अव्यवस्था का असर यात्रा प्रबंधन पर भी: सोनप्रयाग से ही तीर्थयात्री केदारनाथ धाम की यात्रा के लिए आगे बढ़ते हैं. ऐसे में यहां पार्किंग, यात्री आवागमन और अन्य मूलभूत सुविधाओं में अव्यवस्था का असर पूरी यात्रा व्यवस्था पर पड़ सकता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान जलभराव वाले स्थानों को चिह्नित कर वहां स्थायी जल निकासी की व्यवस्था की जानी चाहिए.
