रुद्रुपर: काशीपुर की एक महिला की ओर से अपने दिवंगत पति के बीमा दावे को लेकर दायर की गई शिकायत पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. आयोग ने बीमा कंपनी की तकनीकी आपत्तियों को खारिज करते हुए पीड़िता के पक्ष में निर्णय दिया है. साथ ही बीमा राशि के साथ मानसिक उत्पीड़न और वाद व्यय की धनराशि भी अदा करने के निर्देश दिए हैं.
काशीपुर क्षेत्र के ग्राम बरखेड़ा पांडे निवासी बतूल बेगम को अपने दिवंगत पति के बीमा दावे के लिए लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा. आखिरकार जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग से उन्हें न्याय मिला. आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से किए गए अनावश्यक विलंब और दावे के निस्तारण में बरती गई लापरवाही को सेवा में कमी मानते हुए कंपनी को बीमा राशि समेत कुल 2 लाख 7 हजार रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया है.
जानकारी के मुताबिक, बतूल बेगम के पति मोहम्मद शरीफ का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में बचत खाता था. उनके खाते के माध्यम से प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत नियमित रूप से प्रीमियम जमा किया गया था. साल 2023 में मोहम्मद शरीफ एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे. उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई. पति की मौत के बाद बतूल बेगम ने योजना के तहत मिलने वाली बीमा राशि प्राप्त करने के लिए बैंक के माध्यम से सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करते हुए बीमा दावा पेश किया.
बीमा दावा लंबित रखा, शिकायतकर्ता को लेनी पड़ी आयोग की शरण: शिकायतकर्ता का आरोप था कि सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद लंबे समय तक बीमा दावा लंबित रखा गया और उसका निस्तारण नहीं किया गया. लगातार प्रयासों के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकला, तो उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग की शरण ली और न्याय की गुहार लगाई.
बैंक ने प्रीमियम राशि समय पर बीमा कंपनी को भेजने की कही बात: मामले की सुनवाई के दौरान यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने आयोग को बताया कि उसने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए प्रीमियम राशि समय पर बीमा कंपनी को भेज दी थी. इसके अलावा बीमा दावा प्रपत्र और अन्य दस्तावेज भी ई-मेल के माध्यम से संबंधित बीमा कंपनी को अग्रेषित कर दिए गए थे.
