देहरादून: उत्तराखंड लंबे समय से चारधाम यात्रा, धार्मिक पर्यटन और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है. लेकिन अब राज्य की पहचान केवल तीर्थाटन तक सीमित नहीं रह गई है. बीते कुछ सालों में इको टूरिज्म के क्षेत्र में हुए प्रयोगों और नई योजनाओं का असर जमीन पर साफ दिखाई देने लगा है. हालात यह हैं कि राज्य के प्रमुख इको टूरिज्म स्थलों पर पर्यटकों की संख्या लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है. देहरादून चिड़ियाघर और लच्छीवाला नेचर पार्क में हाल ही में दर्ज हुई पर्यटकों की संख्या इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखंड में प्रकृति आधारित पर्यटन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है.
चारधाम यात्रा के दौरान जहां लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंच रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में पर्यटक इको टूरिज्म स्थलों का भी रुख कर रहे हैं. वन विभाग की ओर से पिछले कुछ वर्षों में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहल की गई हैं. जंगलों, नेचर पार्कों, वन विश्राम गृहों और प्राकृतिक स्थलों को पर्यटन के लिहाज से विकसित किया गया है. इसका सकारात्मक परिणाम अब पर्यटकों की बढ़ती संख्या के रूप में सामने आ रहा है.अगर देहरादून चिड़ियाघर के आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां लगातार नए रिकॉर्ड बन रहे हैं. वर्ष 2023 में 18 जून को एक दिन में 8065 पर्यटक चिड़ियाघर पहुंचे थे. उस दिन टिकटों और अन्य मदों से कुल 5 लाख 21 हजार 570 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था.
उस समय इसे चिड़ियाघर के इतिहास का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना गया था. इसके बाद 8 जून 2025 को चिड़ियाघर में 7789 पर्यटक पहुंचे. हालांकि पर्यटकों की संख्या के लिहाज से यह रिकॉर्ड नहीं था, लेकिन आमदनी के मामले में इस दिन ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए. उस दिन चिड़ियाघर को 6 लाख 3 हजार 800 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था. यह पहली बार था जब किसी एक दिन में चिड़ियाघर की आमदनी छह लाख रुपये के आंकड़े को पार कर गई थी.पर्यटकों का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका. 4 जनवरी 2026 को देहरादून चिड़ियाघर में 8662 पर्यटक पहुंचे और 5 लाख 44 हजार 860 रुपये की आय दर्ज की गई.
बड़ी संख्या में पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना विभाग के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. पर्यटक स्थलों पर साफ-सफाई बनाए रखना, पार्किंग, पेयजल, शौचालय, सुरक्षा और यातायात जैसी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना जरूरी हो गया है. इसके अलावा इको टूरिज्म का मूल उद्देश्य प्रकृति संरक्षण है, इसलिए यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि बढ़ती पर्यटक संख्या से पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े.
-पीके पात्रो, सीसीएफ इको टूरिज्म-
इसके बाद 22 मार्च 2026 को एक नया इतिहास बना, जब 10 हजार 148 पर्यटक चिड़ियाघर पहुंचे. उस दिन 6 लाख 76 हजार 690 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ और यह सभी पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने वाला दिन साबित हुआ. हालांकि यह रिकॉर्ड भी ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रह सका. 14 जून 2026, रविवार को देहरादून चिड़ियाघर ने फिर से अपने सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए. इस दिन चिड़ियाघर में कुल 10 हजार 621 पर्यटक पहुंचे. इतनी बड़ी संख्या में पर्यटकों की मौजूदगी ने न केवल नया रिकॉर्ड बनाया बल्कि राजस्व के मामले में भी नया इतिहास रच दिया. एक ही दिन में चिड़ियाघर को 7 लाख 9 हजार 570 रुपये की रिकॉर्ड आमदनी हुई.
