दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को पटियाला हाउस कोर्ट में बुल्ली बाई ऐप (Bulli Bai App) के कथित निर्माता नीरज बिश्नोई (Neeraj Bishnoi) की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जांच अभी बहुत प्रारंभिक चरण में है। दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए सरकारी वकील एडवोकेट इरफान अहमद ने कहा कि आरोपी के ट्विटर हैंडल पर सामग्री अपमानजनक थी और आरोपी एक विशेष समुदाय की महिलाओं को निशाना बनाने के लिए “सुल्ली” और “बुल्ली” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहा था।
उन्होंने कहा कि उसने ही वेबसाइट बनाई थी। जांच अधिकारी अभी भी जांच कर रहे हैं और अब तक केवल एक पीड़ित सामने आया है और कई अन्य हैं, जिनका पता लगाना बाकी है।
दलीलों पर गौर करने के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने इस मामले को आगे की बहस के लिए 27 जनवरी के लिए टाल दिया और दिल्ली पुलिस से मामले में नए सिरे से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।
नीरज बिश्नोई की ओर से पेश हुए वकील एल ओझा ने कहा कि मेरे मुवक्क्लि को एक संदिग्ध के रूप में गिरफ्तार किया गया था। यह एक जमानती अपराध है, लेकिन खुलासे के दौरान, उस पर आईटी अधिनियम की धाराएं लगाई गईं। जो ट्विटर हैंडल अपराध में इस्तेमाल किया गया था, उस पर मेरे क्लाइंट ने किसी भी अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि एफआईआर में धारा 153A लगाई गई है जो सांप्रदायिक सद्भाव के बारे में है। उन्होंने कहा कि शिकायत एक व्यक्ति की है और कोई समूह या समुदाय नहीं है।
गिटहब पर बनाए गए बुल्ली बाई ऐप निर्माता और मुख्य साजिशकर्ता कहे जा रहे 21 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र नीरज बिश्नोई को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस यूनिट (IFSO) द्वारा 5 जनवरी, 2022 को असम के जोरहाट से गिरफ्तार किया गया था।
इससे पहले, मजिस्ट्रेट कोर्ट ने नीरज बिश्नोई की जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि आरोपी द्वारा बनाए गए इस ऐप पर सांप्रदायिक रंग वाली आपत्तिजनक सामग्री के साथ मुस्लिम महिलाओं को बदनाम करने का अभियान चलाया गया था।
मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट पंकज शर्मा ने कहा था कि आरोप की व्यापकता और जांच के स्तर को देखते हुए इस स्तर पर जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता है। अदालत ने यह भी गौर किया कि तथ्यों से पता चलता है कि आरोपी ने “बुल्ली बाई” ऐप बनाया, जहां महिला पत्रकारों और एक विशेष समुदाय की मशहूर हस्तियों को निशाना बनाया जाता था, जो सोशल मीडिया पर प्रसिद्ध हैं। उनका अपमान करने के उद्देश्य से उन्हें एक ऑब्जेक्ट के रूप में गलत तरीके से पेश किया जाता था।
दिल्ली पुलिस ने पहले कहा था कि पूछताछ के दौरान नीरज बिश्नोई ने खुलासा किया है कि ऐप को नवंबर 2021 में बनाया गया था और 21 दिसंबर को अपडेट किया गया था और उसने कहा था कि उसने ऐप के बारे में बात करने के लिए एक और ट्विटर अकाउंट बनाया था।
