राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस के मामलों में बढ़ोतरी के बाद सुप्रीम कोर्ट वर्चुअल मोड पर सुनवाई कर रहा है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो रही सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट को कई दिक्कतों का सामना भी करना पड़ रहा है। सोमवार को वर्चुअल सुनवाई के दौरान बार-बार होने वाली रुकावटों से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों को हिदायत दे दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी और कहा कि इसे प्रतिबंधित करना पड़ सकता है।
भारत के मुख्य न्यायाधीष एनवी रमना के नेतृत्व वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा ‘वकील अपने मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए पेश हो रहे हैं और दिखाई नहीं दे रहे हैं। हमें इस मोबाइल बिजनेस पर प्रतिबंध लगाना पड़ सकता है। मिस्टर काउंसिल, अब आप सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे हैं और आप नियमित रूप से उपस्थित होते हैं। क्या आप बहस करने के लिए एक डेस्कटॉप नहीं रख सकते हैं।’
दरअसल, सीजेआई की टिप्पणी तब आई जब उनकी पीठ को लंच से पहले के सत्र में कार्यवाही के दौरान अधिवक्ताओं की ओर से बार-बार ऑडियो-विजुअल व्यवधानों के कारण लगभग 10 मामलों में सुनवाई स्थगित करने से लिए मजबूर होना पड़ा। सुनवाई के दौरान आ रही अड़चनों से परेसान सीजेआई ने कहा कि हमारे पास इस तरह से मामलों को सुनने की ताकत नहीं है। कृपया एक ऐसा सिस्टम तैयार करें जिससे हम आपको सुन सके। इस तरह से दस मामलों की सुनवाई हो चुकी है और हम चिल्ला रहे हैं।
सीजेआई की टिप्पणी के बाद सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्री की ओर से जारी एक नोटिफिकेशन में सभी अधिवक्ताओं और पार्टी-इन-पर्सन से अनुरोध करते हुए कहा गया है वो न्यायालय की सुनवाई में किसी भी व्यवधान से बचने के लिए, एक स्टेबल इंटरनेट कनेक्शन के साथ डेस्कटॉप या फिर लैपटॉप के जरिए वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कार्यवाही में शामिल हों।
