उत्तराखंड चुनाव कांग्रेस के लिए विस चुनाव दो मायनों से बेहद महत्वपूर्ण हो चुके हैं। मिशन-2022 में जुटी कांग्रेस के लिए विधानसभा चुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न है। पहला, कांग्रेस को 2017 में मिली हार का बदला चुकाकर खुद को साबित करना है। वहीं राज्य में हालिया कुछ वर्ष में आप समेत कुछ स्थानीय दलों के उबार की वजह से कांग्रेस को भविष्य के लिए भी तैयार होना है। 2017 के चुनाव में कांग्रेस की हार की वजह उसका जनाधार कम होना नहीं था, बल्कि भाजपा द्वारा बसपा, यूकेडी, निर्दलीय आदि के वोट बैंक में सेंध लगाना था। 2012 और 2017 में कांग्रेस ने अपना वोट बैंक 33 प्रतिशत से अधिक बनाए रखा है
लेकिन वर्ष 2012 में महज 33.13 प्रतिशत वोट हासिल करने वाली भाजपा ने 2017 के चुनाव में 12 प्रतिशत ज्यादा वोट हासिल किए थे। ये वोट भाजपा को दूसरे दलों के वोट बैंक से फिसल कर मिले थे। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस और भाजपा आम आदमी पार्टी को लेकर बेपरवाही तो जाहिर कर रही है, लेकिन अंदरखाने आप चिंता का सबब भी बनी है। जिस आक्रामक अंदाज के साथ आप ने सक्रियता बढ़ाई है, माना जा रहा है कि कुछ सीटों पर यह दोनों दलों को नुकसान भी पहुंचा सकती है।
