देहरादून के चकराता रोड पर कनॉट प्लेस स्थित एलआईसी बिल्डिंग को खाली कराने के नोटिस के बाद हड़कंप की स्थिति है। एलआईसी ने कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए बिल्डिंग को खाली कराने के लिए पुलिस-प्रशासन की मदद मांगी है। पहले चरण में 14 संपत्तियां (आवास और दुकानें) खाली कराई जानी हैं। पुलिस ने 14 सितंबर तक का अल्टीमेटम दिया है।
पिछले दिनों से एलआईसी के अधिकारियों ने जिला प्रशासन और पुलिस के अफसरों से मुलाकात की। इसमें प्रक्रिया पूरी कराने की बात कही। इसके बाद जिला प्रशासन ने एक मजिस्ट्रेट नियुक्त किया। वहीं, पुलिस ने पर्याप्त पुलिस फोर्स उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इधर, एलआईसी ने बिल्डिंग में नोटिस चस्पा कर दिए। इसका दुकानदार विरोध कर रहे हैं।
एसपी सिटी सरिता डोबाल का कहना है कि एलआईसी के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट से एक आदेश आया है। इसको एलआईसी ने जिला प्रशासन को भी उपलब्ध कराया है। प्रशासन ने पुलिस फोर्स उपलब्ध कराने के लिए कहा है। फोर्स उपलब्ध कराई जाएगी। उधर, सीओ सिटी नरेंद्र पंत ने बताया कि प्रशासन की ओर से मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए हैं। प्रथम चरण में 14 प्रॉपर्टी खाली कराई जानी हैं।
लोग बोले, पाक से आकर बसे, अब कहां जाएं
दुकानें और आवास खाली कराने के नोटिस के बाद से लोगों में बैचेनी है। उनके कारोबार यहां पर है और परिवार का गुजारा चलता है। कुछ परिवार ऐसे हैं, जो पाक से यहां आए। आर्मी ट्रेडिंग के नाम से दुकान चलाने वाले अधिवक्ता देवेंद्र सिंह कहा कि यहां पर 150 दुकान और फ्लैट हैं। गिरासु भवन की गलत रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। कुछ हिस्सों के जर्जर होने का मामला था।
उसे पूरी बिल्डिंग से जोड़कर भ्रम फैलाया जा रहा है। सैलून संचालक इलियास अहमद ने बताया कि उन्हें यहां करीब 60 साल हो गए हैं। किराया कोर्ट में जमा किया जा रहा है। कोर्ट का फैसला एक संपत्ति को लेकर है, लेकिन वह पूरी बिल्डिंग को खाली कराना चाहते हैं। कार्रवाई का विरोध सभी दुकानदार करेंगे। बंटवारे के समय पाकिस्तान से आए भीमसेन विरमानी, बुजुर्ग एसजे कोहली भी यहां कारोबार कर जीवन यापन कर रहे हैं।
2018 में भी चस्पा हुए थे खाली कराने के नोटिस
व्यापारियों ने बताया कि अंग्रेजों के जमाने के बड़े बैंकर्स सेठ मनसाराम ने इस बिल्डिंग का निर्माण कराया था। वह दिवालिया हो गए तो भारत इंश्योरेंस ने संपत्ति को जब्त कर लिया। इसके बाद संपत्ति एलआईसी के पास आ गई। चूंकि किरायेदार मनसाराम के समय से रह रहे थे तो यथास्थिति चलती रही। एलआईसी का तर्क है कि लोग मामूली किराया दे रहे हैं। मामला कोर्ट में भी चल रहा है। 2018 में भी एलआईसी ने बिल्डिंग खाली कराने के लिए नोटिस चस्पा किए थे।
बिल्डिंग ध्वस्तीकरण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं
कनॉट प्लेस शहर का व्यवसायिक केंद्र है। कनॉट प्लेस की यह बिल्डिंग खाली कराने के बाद ध्वस्त होगी या नहीं, इसे लेकर स्पष्ट स्थिति नहीं है। पुलिस ने इस संबंध में जानकारी से इनकार किया है। वहीं एलआईसी के अधिकारी भी इस संबंध में कुछ भी कहने से बच रहे हैं। प्रशासन के अधिकारी भी इस संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं कर सके। चर्चा है कि खाली कराने के बाद बिल्डिंग को धवस्त किया जा सकता है। हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी।
