एमबीपीजी कॉलेज में छात्र संख्या का दबाव कम करने के उद्देश्य से राजकीय महाविद्यालय हल्द्वानी शहर, गौलापार क्षेत्र में खोला गया था। बगैर संसाधन एक पुराने विद्यालय भवन के पांच कमरों में शुरू किए गए इस डिग्री कॉलेज में दूसरे ही साल में दाखिले लड़खड़ा गए हैं।
स्नातक (यूजी) प्रथम सेमेस्टर में पंजीकरण कराने वाले विद्यार्थी प्रवेश लेने नहीं आ रहे हैं। स्थिति यह है कि 200 से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराया था। इनमें से महज पांच ने ही अभी तक दस्तावेज सत्यापन कराया है, लेकिन एक ने भी प्रवेश शुल्क जमा नहीं किया है।
पिछले साल नवंबर में शुरू राजकीय महाविद्यालय हल्द्वानी शहर गौलापार में स्नातक की 480 सीटें हैं। एमबीपीजी कॉलेज में सीटें फुल होने के बाद यहां दाखिले हुए थे। 350 से ज्यादा विद्यार्थियों ने बीए, बीएससी और बीकॉम में प्रवेश लिया था। यहां शिक्षा शस्त्रत्त्, भू-विज्ञान और कम्प्यूटर विज्ञान जैसे विषय भी शुरू किए गए हैं।
सरकार ने कॉलेज खोलने के बाद यहां संसाधन उपलब्ध नहीं कराए। वर्तमान में यहां 17 प्राध्यापक हैं। इनमें 4 स्थाई और 13 अस्थाई हैं। कॉलेज के पास कुल 6 कमरे हैं। इनमें से 5 कमरों में कक्षाएं चलती हैं। एमबीपीजी कॉलेज में छात्र संख्या का दबाव कम करने के लिए खोला गया यह कॉलेज पिछले साल भी दाखिलों के लिए एमबीपीजी कॉलेज पर निर्भर रहा। इस साल भी स्थितियां कमोबेश ऐसी ही हैं।
एमबीपीजी में सीटें फुल होने पर गौलापार कॉलेज के प्राध्यापकों को उम्मीद है कि बचे हुए विद्यार्थी यहां आएंगे और पिछले वर्ष की तरह छात्र संख्या रहेगी।
हल्द्वानी शहर से दूर होना दाखिलों में बना बाधा
हल्द्वानी में नया कॉलेज राजकीय महाविद्यालय हल्द्वानी शहर के नाम से स्वीकृत किया गया था। लेकिन राजनीतिक खींचतान के बीच यह कॉलेज हल्द्वानी शहर से तकरीबन 15 किलोमीटर दूर लालकुआं विधानसभा क्षेत्र के गौलापार इलाके में खोला गया। यहां के प्राध्यापकों ने स्थानीय स्कूलों में 12वीं के विद्यार्थियों की कांउसलिंग भी की थी, लेकिन दाखिले नहीं बढ़ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि कॉलेज में विषयों के अनुसार संसाधन और भवन न होना, कॉलेज का शहर से काफी दूर होना प्रवेश में समस्या का सबसे बड़ा कारण है।
गौलापार कॉलेज में ऑफलाइन भी होंगे दाखिले
गौलापार कॉलेज में ऑफलाइन भी दाखिले होंगे। अन्य कॉलेजों में प्रवेश से वंचित रहने वाले विद्यार्थियों को यहां मौका मिल सकता है। साथ ही नई शिक्षा नीति के तहत यहां 4 मेजर और सेमी मेजर का विकल्प दिया जा रहा है। साथ ही कौशल पाठ्यक्रम में कुमाऊं विवि द्वारा तय किए गए कोर्सों में से 5 विषयों को कॉलेज प्रशासन द्वारा चुना गया है। इनके अनुसार विद्यार्थी एक कौशल विषय चुन सकते हैं।
कॉलेज में नई शिक्षा नीति के अनुसार प्रवेश शुरू हो गए हैं। प्रवेश को लेकर छात्रों की स्कूल में जाकर प्राध्यापकों ने काउंसलिंग भी की थी। अभी प्रवेश कम हैं, लेकिन संख्या में इजाफा होगा। हम ऑफलाइन माध्यम से भी प्रवेश देंगे।
