उत्तराखंड में अब आउटसोर्स भर्ती को लेकर भाई भतीजावाद और सिफारिश नहीं चलेगी। आउटसोर्स भर्ती को लेकर पारदर्शी व्यवस्था लागू करने को धामी सरकार की कैबिनेट ने मंजूरी दी। सेवायोजन विभाग की ओर से एनआईसी के जरिए भर्ती का पोर्टल तैयार होगा। पोर्टल में पंजीकरण करने वाले हर बेरोजगार तक हर विभाग के खाली पदों की जानकारी पहुंचेगी।
इस नए आउटसोर्स सिस्टम को कौशल विकास, सेवायोजन विभाग लीड करेगा। विभाग एनआईसी से एक पोर्टल बनवाएगा। एनआईसी को अपनी जरूरतें बताते हुए पोर्टल को उसी हिसाब से डिजाइन किया जाएगा। इस पोर्टल पर बेरोजगार अपना पंजीकरण करवाएंगे। ये पोर्टल केंद्र सरकार के जैम पोर्टल से भी लिंक रहेगा।
इससे जैम पोर्टल पर आने वाली नौकरियों की जानकारी भी राज्य के युवाओं को मिलेंगी। कौशल विकास विभाग अन्य विभागों को भी जानकारी देगा कि कैसे उन्हें पोर्टल पर अपने विभागों में खाली पदों की जानकारी अपलोड करनी है। श्रम विभाग और वित्त विभाग मिलकर तय करेंगे कि आउटसोर्स के किस पद के लिए क्या मानदेय हो। ताकि मानदेय में एकरुपता रहे।
मैनपॉवर सप्लाई करने वाली एजेंसियों का टेंडर के जरिए चयन होगा। एजेंसी पदों के अनुरूप योग्यता तय कर विभागों से मंजूरी लेगा। विभाग अपने पदों का ब्यौरा पोर्टल पर अपलोड करेंगे। इन पदों की जानकारी सभी बेरोजगारों के मोबाइल, ईमेल पर पहुंच जाएगी। समाचार पत्रों में विज्ञापन भी जारी होगा।
पद की योग्यता के अनुरूप बेरोजगारों की एक लिस्ट कम्प्यूटर सिस्टम से अपने आप तैयार होगी। ये लिस्ट एजेंसी के जरिए विभाग तक पहुंचेगी। जिसमें किसी भी अभ्यर्थी का नाम और पता नहीं होगा। सिर्फ सीरियल नंबर होगा। विभाग योग्यता को देखते हुए चयन कर सूची एजेंसी को सौंप देंगे। चयनित लोगों के साथ एजेंसी करार कर नियुक्ति पत्र देगी।
राज्य के सभी सेवायोजन कार्यालयों में बेरोजगार भर्ती पोर्टल के लिए अपना ऑफलाइन पंजीकरण करा सकेंगे। ये पंजीकरण ऑनलाइन भी हो सकेगा। अपनी सुविधा के अनुसार बेरोजगारों के पास पंजीकरण का विकल्प मौजूद रहेगा। जो लोग सेवायोजन विभागों में पहले से ही पंजीकृत हैं, उन्हें नए सिरे से पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी।
8.39 लाख हैं पंजीकृत बेरोजगार
उत्तराखंड के सभी सेवायोजन विभागों में अभी पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 8.39 लाख है। अभी राज्य में उपनल और पीआरडी के जरिए ही आउटसोर्स नौकरी दी जाती है। उपनल में अभी सिर्फ पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को ही नौकरी देने का प्रावधान है। जबकि पीआरडी में हर श्रेणी के लोगों को आउटसोर्स के जरिए विभागों में नौकरी मिलती है।
आउटसोर्स की एक पारदर्शी व्यवस्था तैयार की गई है। इसके लिए तेलंगाना, उड़ीसा, यूपी, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों की आउटसोर्स व्यवस्था का अध्ययन किया गया। इन सभी पांचों राज्यों की आउटसोर्स व्यवस्था के बेहतर बिंदुओं को लेते हुए उत्तराखंड की पारदर्शी आउटसोर्स व्यवस्था शुरू की जा रही है। इस नई व्यवस्था से राज्य के सभी युवाओं को नौकरियों के लिए बराबर का मौका मिलेगा।
