देहरादून. पूर्ण बहुमत के साथ दोबारा में सत्ता में आने के बाद भी उत्तराखंड की सियासत लगातार गरमाई हुई है. हैरानी की बात यह है कि सियासत विपक्ष की वजह से नहीं; बल्कि सत्तापक्ष की अंदरूनी खींचतान के कारण ही गर्म है. उत्तराखंड में दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के बयानों से खूब हलचल मची हुई है. पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत ने कुछ ऐसे बयान दे डाले हैं जिससे सरकार के कामकाज करने के तरीके पर सवाल उठ रहे हैं.
दोनों नेताओं ने भ्रष्टाचार को लेकर कड़े बयान दिए हैं. ये ऐसे बयान हैं जिनसे राज्य सरकार की काम करने का तौर तरीका कठघरे में खड़ा हो गया है. इन बयानों का आने वाले समय के लिए बड़े राजनीतिक अर्थ निकाले जा सकते हैं. पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जहां जारी भ्रष्टाचार को राज्य के लिए दीमक करार दिया है तो वहीं पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत ने तो सरकारी योजनाओं से जुड़े विकास कार्यों में 20 प्रतिशत कमीशन देने तक की बात तक कह डाली है.
इन दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों के बयान ऐसे समय में आए हैं जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी छवि एक ऐसे मुख्यमंत्री के तौर पर बनाने में जुटे हुए हैं, जो भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार कर रहा है. दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों के बयान से ऐसा सियासी बवाल मचा है जिसकी आंच दिल्ली दरबार तक भी पहुंच गई है. हालात ऐसे रहे हैं कि पिछले दो दिनों के भीतर पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत से केंद्रीय नेतृत्व को बात भी करनी पड़ी है.
हालांकि, सूत्रों के मुताबिक दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों ने अपनी कही बात को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की बात कही है. यही नहीं पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत तो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मुलाकात कर आए. वहीं, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी दोनों नेताओं से मुलाकात की है. महेंद्र भट्ट दोनों नेताओं से दिल्ली में मुलाकात की. साथ ही मसले को लेकर राष्ट्रीय महामंत्री संगठन और प्रदेश प्रभारी से भी मुलाकात की.
