उत्तराखंड जैसे शांत आबोहवा वाले प्रदेश में बड़े महानगरों में होने वाली हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी के मामले तेजी से बढ़े हैं। उत्तराखंड के पुरुष देश में में सिक्किम के बाद सबसे ज्यादा इससे पीड़ित हैं। प्रदेश में महिलाओं से करीब दोगुना पुरुष इसके शिकार हो रहे हैं। 180 से अधिक बीपी वालों को दवाओं के साथ इंजेक्शन तक देने की नौबत आ रही है।
हार्ट अटैक, स्ट्रोक, हार्ट फेलियर, धुंधलापन, डिमेंशिया, किडनी फेलियर और इरेक्टाइल डिसफंक्शन जैसी परेशानियां हो रही हैं। एनएफएचएस-5 सर्वेक्षण में सामने आए आंकड़ों से इसका खुलासा हुआ है। उत्तराखंड में 31.8 फीसदी पुरुष बीपी से पीड़ित है, जबकि 3.7 प्रतिशत मरीज हाई बीपी के शिकार हो चुके हैं।
इससे ज्यादा सिक्किम में 5.9 फीसदी पुरुष हाई बीपी से पीड़ित हैं। पंजाब में 3.4 और नागालैंड में 3.1 फीसदी लोग हाई बीपी से परेशान है। उत्तराखंड में 22.9 फीसदी महिलाएं बीपी, 2.1 फीसदी हाईबीपी की शिकार है। भारत में 24 फीसदी पुरुष बीपी और 1.7 फीसदी हाईबीपी, 21.3 फीसदी महिलाएं बीपी और 1.6 फीसदी हाईबीपी से पीड़ित है।
दून मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. कुमार जी कौल ने बताया कि 40 साल से ज्यादा, शुगर के मरीजों, गर्भवती महिलाओं में बीपी की ज्यादा समस्या देखी जा रही है। कोलस्ट्रोल बढ़ा होने से भी बीपी बढ़ता है।
दवा न खाने से बढ़ रही बीपी की समस्या
सर्वे में सामने आया कि 0.5 फीसदी पुरुष और 0.6 फीसदी महिलाएं ही बीपी की सामान्य स्टेज में दवाएं लेते हैं। बाकी लोगों के दवा न लेने से उन्हें उच्च रक्तचाप की समस्या घेर रही है
48.5% खतरे की जद में
उत्तराखंड में 48.5% पुरुष और 40.8 % महिलाएं ऐसी मिली है। जिनका बीपी बार्डर लाइन पर है। उन्होंने यदि दिनचर्या या खानपीन में बदलाव नहीं किया तो बीपी की समस्या उन्हें घेर लेगी। आर्थिक रूप से संपन्न 24.9% और गरीबी रेखा से नीचे 18.5 % में बीपी की समस्या मिली।
दवा खाने में महिलाएं आगे
देश में 67 फीसदी महिलाएं ऐसी मिली जिन्होंने अपने ब्लड प्रेशर की जांच कराई। पुरुषों की संख्या 53.7 फीसदी ही थी। ब्लड प्रेशर कम करने को 7.4 फीसदी महिलाएं दवा खा रही है, जबकि पुरुष 5.6 फीसदी ही दवा खाते मिले।
धूम्रपान, गलत खानपान/ दिनचर्या, मोटापा, तनाव, दवा खाने में लापरवाही की वजह से बीपी की समस्या गंभीर हो रही है।
डा. नारायणजीत सिंह,एचओडी मेडिसिन, दून मेडिकल कॉलेज
