सीएम धामी के लिए अपनी सीट छोड़ने वाले कैलाश गहतोड़ी को इनाम मिल सकता है। सियासी जानकार मान रहे हैं कि विधायकी छोड़ने के बाद कैलाश गहतोड़ी का राजनीतिक ग्राफ ऊंचा होगा। इस कारण यह है कि साल 2002 से अब तक मुख्यमंत्री के लिए जितने भी विधायकों ने इस्तीफा दिया है, उनमें से सभी को पार्टी और सरकार ने सम्मान दिया
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए विधायकी छोड़ने वाले कैलाश गहतोड़ी को कोई ओहदा मिल सकता है, ऐसी सियासी चर्चाएं हैं। 22 साल के उत्तराखंड में चार विधायकों ने सीएम के लिए विधानसभा सीट छोड़ी और सभी की राजनीतिक ताकत पहले से ज्यादा बढ़ी।
पांचवें विधानसभा चुनाव में दो तिहाई बहुमत हासिल कर भाजपा लगातार दूसरी बार सत्ता पर काबिज हुई लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खटीमा सीट से चुनाव हार गए। चुनाव नतीजा आने के बाद चंपावत के विधायक कैलाश गहतोड़ी ने मुख्यमंत्री के लिए अपनी सीट छोड़ने का प्रस्ताव रखा और पार्टी आलाकमान की हरी झंडी के बाद 21 अप्रैल को गहतोड़ी ने बाकायदा विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा भी दे दिया।
अब मुख्यमंत्री धामी चंपावत सीट से उपचुनाव लड़ेंगे। सियासी जानकार मान रहे हैं कि विधायकी छोड़ने के बाद कैलाश गहतोड़ी का राजनीतिक ग्राफ ऊंचा होगा। इस कारण यह है कि साल 2002 से अब तक मुख्यमंत्री के लिए जितने भी विधायकों ने इस्तीफा दिया है, उनमें से सभी को पार्टी और सरकार ने सम्मान दिया। इस्तीफा देने वाले तीन विधायकों को दर्जा मंत्री और एक विधायक को सांसद बनाया गया है।
मुख्यमंत्री के लिए सीट छोड़ने पर मिला ओहदा
| साल | सीट छोड़ने वाले विधायक | मिली जिम्मेदारी |
| 2002 | योगंबर सिंह रावत | अध्यक्ष, उत्तराखंड वन विकास निगम |
| 2007 | टीपीएस रावत | बीसी खंडूड़ी की खाली हुई पौड़ी सीट से सांसद बने |
| 2012 | किरन मंडल | अध्यक्ष, कुमाऊं मंडल विकास निगम |
| 2014 | हरीश धामी | अध्यक्ष, उत्तराखंड वन विकास निगम |
